Monday, 13 December 2010
Sunday, 12 December 2010
Saturday, 11 December 2010
Thursday, 9 December 2010
स्वामीजी के विचार
विवेक शून्य सदाचार तो वृक्षों में भी है परन्तु उन्हें कोई मानवता नहीं मिलती, क्योकि वे बेचारे जड़ता के दोष में आबद्ध है | संग्रह रहित बहुत से पशु भी होते है , परन्तु उन बेचारो को कोई साम्यवादी या परमहंस नहीं कहता | पराये बनाये घर में बहुत से पशु रह सकते है , पर उन्हें कोई विरक्त नहीं कहता | इससे यह सिद्ध हुआ कि विवेकपूर्वक उदारता एवं त्याग से ही मानव "मानव" होता है | - मानव की मांग पेज ११
Wednesday, 8 December 2010
Monday, 6 December 2010
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